साहित्य
मुक्तक
माेती रत्न
कैलाली
उ नेपाल डाई चिल्लाइटी नाेचुवा पाके ।
सुपुत्रनसे खुल्लम-खुल्ला बेचुवा पाके ।
पस्छिउ किल्ला-कांगडा, पुरुवके टिस्टा,
बेहालीमे हेरी, डिनडेहारे ठेचुवा पाके ।
|||] गजल [|||
निर्मल चाैधरी
जानकी गाउँपालिका-५,अमाैरी (कैलाली)
सपजाने मिल्के ठारुनके नयाँ साल माघी मनाई परल।
सखिया झुम्रा नच्टी सुनसान बस्टी चैनार कराई परल।
सडियौंसे चलल हमार पुर्खनके संस्कृटी हेरैटी जाईटा।
राट भर मुरा टपटी डफ संगे मन्जिरा फे बजाई परल।
बर्सौं डिन पर्से एकडिन आईठ नयाँ साल माघ हमार।
सजना गैटी छोटसे लैके बर सम सक्हुन नचाई परल।
जिन्डगी कहना अस्ट हो कबु सुख ट कबु बेराम पर्बो।
बाँचट सम डुख पीर सप भुलाके सक्हुन हसाई परल।
मीठ मीठ घोङ्घी ओ मच्छ्री संगे सुरिक सिकार खैटी।
घर घर जाके एक डुई खोर्या हिरहोट्ठा फे लगाई परल।
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|||] गजल [|||
निर्मल चाैधरी
जानकी गाउँपालिका-५,अमाैरी (कैलाली)
सपजाने मिल्के ठारुनके नयाँ साल माघी मनाई परल।
सखिया झुम्रा नच्टी सुनसान बस्टी चैनार कराई परल।
सडियौंसे चलल हमार पुर्खनके संस्कृटी हेरैटी जाईटा।
राट भर मुरा टपटी डफ संगे मन्जिरा फे बजाई परल।
बर्सौं डिन पर्से एकडिन आईठ नयाँ साल माघ हमार।
सजना गैटी छोटसे लैके बर सम सक्हुन नचाई परल।
जिन्डगी कहना अस्ट हो कबु सुख ट कबु बेराम पर्बो।
बाँचट सम डुख पीर सप भुलाके सक्हुन हसाई परल।
मीठ मीठ घोङ्घी ओ मच्छ्री संगे सुरिक सिकार खैटी।
घर घर जाके एक डुई खोर्या हिरहोट्ठा फे लगाई परल।
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